लोगो का लोगो के दुवारा लोगो के लिए हम चाहे दुनिया का कितना भी अच्छा संबिधान बना ले यदि उसे अमल में लाने बाले लोग जबतक नही होंगे बेकार ही रहेगा।
एक वोट एक व्यक्ति की समस्या जबतक दूर नही होगी लोकतंत्र अधुरा रहेगा इसलिए आवाज उठती रहेगी आजादी की
क्योकि हो सकता कुछ लोगो का राजनीती में बने रहना पेशा बन जाए और लोकसभा विधानसभा राज्यसभा मंत्रीमण्डल के जीवन को वो अपना जीवन समझने लगे उसके बिना जीना उन्हें ठीक वैसा लगे जैसे की मछली को पानी के बिना इससे इससे सम्बिधान ओर लोकतंत्र को खतरा हो जाता है हर 60 बर्ष के बाद।
रविवार, 4 मई 2014
आजादी
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